उत्पत्ति 49:22..24
"यूसुफ बलवन्त लता की एक शाखा है, वह सोते के पास लगी हुई फलवन्त लता की एक शाखा है; उसकी डालियां भीत पर से चढ़कर फैल जाती हैं॥ धनुर्धारियों ने उसको खेदित किया, और उस पर तीर मारे, और उसके पीछे पड़े हैं॥ पर उसका धनुष दृढ़ रहा, और उसकी बांह और हाथ याकूब के उसी शक्तिमान ईश्वर के हाथों के द्वारा फुर्तीले हुए, जिसके पास से वह चरवाहा आएगा, जो इस्राएल का पत्थर भी ठहरेगा॥"
इन तीन वचनों में पवित्र आत्मा ने यूसुफ के जीवन का सार प्रस्तुत किया है। इनका संक्षिप्त संदेश इस प्रकार है:
1. यूसुफ सोते के पास लगाया गया एक फलवन्त वृक्ष था।
2. उस वृक्ष के सामने एक दीवार थी।
3. धनुर्धारियों ने उस पर तीर चलाकर उसे दुःख पहुँचाया।
4. फिर भी वह वृक्ष गिरा नहीं, बल्कि दृढ़ता से खड़ा रहा।
5. क्योंकि उसकी भुजाएँ याकूब के पराक्रमी परमेश्वर के हाथों से सामर्थी बनाई गई थीं।
जब यूसुफ रूपी यह वृक्ष अभी एक छोटा पौधा ही था, तभी उसके सामने एक दीवार खड़ी हो गई मानो उसे चुनौती दे रही हो—"मैं तुम्हें बढ़ने नहीं दूँगी।" परन्तु उस पौधे ने उस विशाल और मजबूत दीवार से भय नहीं खाया, क्योंकि उसकी जड़ें सोते के जल से प्रतिदिन पोषित होकर बढ़ती जा रही थीं। धीरे-धीरे वह पौधा एक फलवन्त वृक्ष बन गया। अंततः वह दीवार से भी ऊँचा बढ़ गया और उसकी डालियाँ दीवार के ऊपर तक फैल गईं।
इसी प्रकार परमेश्वर की सन्तानों के जीवन में भी शत्रु अनेक दीवारें खड़ी करता है। वह कहता है—"मैं तुम्हें आगे नहीं बढ़ने दूँगा, तुम्हें समाप्त कर दूँगा, तुम्हें दबा दूँगा, तुम्हें गिरा दूँगा।"
परन्तु जिस प्रकार यूसुफ के सामने खड़ी दीवार का सामना करने के लिए याकूब के पराक्रमी परमेश्वर के हाथ उसके साथ थे, उसी प्रकार हमारे लिए भी कीलों के घावों वाले प्रभु यीशु के हाथ उपस्थित हैं। इसलिए किसी भी दीवार को देखकर हमें डरने की आवश्यकता नहीं है, और किसी भी चुनौती से भयभीत होने की ज़रूरत नहीं है। हल्लेलूयाह!
धनुर्धारियों ने यूसुफ रूपी उस वृक्ष पर तीर चलाए। वे धनुर्धारी कोई और नहीं, बल्कि उसके अपने ही भाई थे। लिखा है कि उन्होंने उसे बहुत दुःख पहुँचाया। सामान्यतः तीर शरीर को घायल करते हैं और शारीरिक पीड़ा देते हैं, परन्तु यूसुफ का दुःख केवल शरीर का नहीं था, बल्कि उसके हृदय का था, क्योंकि उसके अपने भाइयों ने उसे चोट पहुँचाई थी।
जब अपने ही भाई-बहन, प्रियजन या निकट के लोग विश्वासघात करते हैं, विरोधी बन जाते हैं, बिना कारण दूर हो जाते हैं, झूठी बातें फैलाते हैं, भलाई के कार्यों में बाधा डालते हैं, मुकदमे और झगड़े खड़े करते हैं, या आपकी सारी संपत्ति छीनकर आपको असहाय छोड़ने का प्रयास करते हैं—तब जो पीड़ा होती है, वह केवल शरीर की नहीं, बल्कि हृदय को तोड़ देने वाली होती है।
इन सब विरोधों और चुनौतियों को सहते हुए, धनुर्धारियों के तीरों का सामना करते हुए भी यूसुफ रूपी वह फलवन्त वृक्ष गिरा नहीं, बल्कि अटल खड़ा रहा। क्योंकि याकूब के पराक्रमी परमेश्वर की भुजाओं ने उसे संभाल रखा था। हल्लेलूयाह!
प्रियजनों, यह इस नए महीने के लिए पवित्र आत्मा का प्रतिज्ञा-भरा संदेश है। इसे विश्वास के साथ ग्रहण कीजिए। हमें थामे रखने वाले कीलों के घावों वाले प्रभु के हाथ हमारे साथ हैं। वे हाथ हमें स्थिर रखने में पूर्णतः विश्वासयोग्य हैं। अपमान और उपहास के बीच, विरोधियों और शत्रुओं के सामने, बीमारी और जीवन की हर प्रतिकूल परिस्थिति से हमें हाथ पकड़कर बाहर निकालने और विजय के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रभु के हाथ सदैव विश्वासयोग्य हैं।
पिछले महीने जब मेरे शरीर में Blood Cancer (ल्यूकेमिया) जैसी गंभीर बीमारी का पता चला, तब भी प्रभु यीशु के प्रेममय हाथों ने मुझे गिरने नहीं दिया। उन्होंने मुझे संभाला, सांत्वना दी, सामर्थ दी और आज भी मुझे चंगाई तथा अनुग्रह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। प्रभु के वे हाथ सचमुच विश्वासयोग्य हैं। आमीन।